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राजू का इन्साफ

लेखक:-एम.मुबीन

 

 

 

एक गडगडाहट की तेज आवाज जिसे सुनकर राजू की ऑंख खुल गई पलंग से उठकर वह खिडकी के पास आया ख़िडकी से बाहर झांक कर उसने देखा तो उस का दिल धक से रह गया  बाग में एक विचित्र सी चीज खडी थी

   ऐसा उनुभव हो रहा था जैसे वह कोई अंतरिक्ष यान है जो किसी दूसरी दुनिया से आया है अभी वह यान को भी ठीक तरह से देख नही पाया था कि यान का दरवाजा खुला और उसमे सें कुछ विचित्र से मानव उतरे

   उनका कद मुश्किल से एक या दो फुट होगा दुबले पतले चेहरे पर छोटी छोटी ऑंखे सिर पर दो लंबे लंबे कान या सींग छोटे छोटे दुबले पतले हाथ पांव 

   अभी वह उन्हे ठीक तरह से देख भी नही पाया था कि एक तेज रौश्नी चमकी और फिर उस प्रकाश से उसका कमरा भर गया

   उसने अपनी ऑंखे बंद कर ली

 ऑंखे खोली तो उसका मन धक से रह गया

वे ूदुसरे ग्रह के विचित्र वासी उसके कमरे में थे ऌससे पहले कि उस के होंठो से कोई बात निकलती उनमें से एक व्यक्ति ने एक छोटी सी पिस्तौल राजू की ओर तान दी उस पिस्तौल से एक शोला निकला और उसके बाद क्या हुआ राजू को कुछ याद नही रहा

   वह अचेत हो गया था

   होश में आया तो उसे ऐसा अनुभव हुआ जैसे वह किसी अंतरिक्ष यान में यात्रा कर रहा है धीरे धीरे उसे सब याद कुछ जो उसके साथ हुआ आया तो वह घबरा गया

   ''मैें कहां हूं'' उसके मुंह से निकला तो उसे उन विचित्र लोगों ने आकर कर घेर लिया

   '' हम टुंबाटो ग्रह के वासी है हे  मानव '' एक बोला

   '' परंतु तुम मुझे कहां ले जा रहे हो ?''

   '' हम आप को टुंबाटो गह्र ले जा रहे है 'उत्तर मे वह जीव बोला

   ' परंतु क्यों?'

   'टुंबेटो ग्रह के कुछ विवाद है जिन का निर्णय कई सालों से नही हो पाया है  हमे पता चला है कि धरती पर बसने वाले मानव पूरे बा्रहमांड में सब से अधिक न्याय प्रिय प्राणी है  ऌसलिए हमारी उच्य सभा ने यह तय किया है कि टुंबाटो ग्रह पर बरसो से चल रहे सभी विादों के फैसलाें के लिए धरती से किसी मानव को लाया जाए  उस कार्य के लिए हम टुंबाटो ग्रह के वासी बकोली आप को टुंबाटो ग्रह ले जा रहे है मानव ''

''मेरा नाम राजू है ' राजू ने अपना परिचय कराया उसे अपहरण कर के किसी और ग्रह ल ेजाया जा रहा है उसे यह पता चल गया था और उसे वहां न्यायधीश की भूमिका निभाते हुए कुछ महत्वपूर्ण फैसले करने थे उसे अपने इस काम का पता भी चल गया था

   दो दिन बाद वह टुंबाटो ग्रह पहुंचे 

वहां पर राजू का स्वागत बकोली लोगों ने बडे उत्साह से किया राजू के स्वागत के लिए हजारो लाखें बकोली जमा हो गए थे और वे उसे उत्साह से उसका स्वागत कर रहे थे जिस तरहा धरती पर किसी बडे राज नेता का एक देश से दूसरे देश जाने पर होता है

   स्वागत सत्कार के बाद उसे न्यायधीश की कुर्सी पर बिठा दिया गया उस न्याय सभा में हजारों बकोली उपस्थित थे

   ''भाईयों ' एक बकोली उठा''वरान राज्य के राजा के रुप में मैं इस न्याय सभा में आप सभी का स्वागत करता हुू टुंबाटो ग्रह पर कई राज्य हैं जिन के कई राजा हैं यह राज्य सदियों से छोटी छोटी बातों के लिए आपस में टकरा रहे हैं लाखों जानें जा चुकी है परंतु कोई निर्णय नहीं हो पा रहा है अंत सारे राजाओं ने तय किया कि सारे विवाद आपसी सहमती समझबुझ से सुलझा लिए जाएं और यह खुन खराबा हमेशा के लिए बंद हो जाए ,परंतु हर फैसला न्याय संगत होना चाहिए हमारे फैसले गलत हो सकते हैं और हो सकता है सभी उन्हें ना माने ऌसलिए हम ने धरती से इस कार्य के लिए एक मानव राजू को बुलाया है मानव बडे न्याय प्रिय होते है हमारे विवादों का राजू अच्छा फैसला कर सकता है'''

   '' हम मानव राजू के सारे फैसले मानेगे ' सारे बकोली एक स्वर में बोले

   ' सब से पहली समस्या का नाम झील के पानी की समस्या है '''बकोली बोला 'यह झील चार राज्यों की सीम पर पडती है हर राज्य यह दावा करता है कि यह झील उसकी है वही इस झील के पानी का उपयोग करेगा दूसरे को एक बूंद पानी लेने नही देगा ऌस लिए सदियों से खून खराबा हो रहा है उस झील के पानी की एक बुूद तक को अभी तक कोई भी राज्या उपयाग नही कर सका परंतु उसके  पानी के लिए उसने लाखों लोगों का खून अवश्य बहाया है इसके बारे में मानव राजू फैसला करे ''

   'फैसला करने की कोई जरुरत नहीं ''राजू बोला ''झील चार राज्यों की सीमा पर स्थित है तो चारों राज्यो  की मिलकियत है चारों राज्य उसके पानी का उपयोंग कर सकतें हैं झील को चार भागों में बांट दिया जाए, हर राज्य अपने हिस्से में आए भाग से ही पानी ले ताकि कोई विवाद और झगडा पैदा ही नही होगा ''

   ''अरे वाह यह तो बहुत अच्छी बात है '' बकुली लोगों के चेहरे खिल उठे

   ' हमे यह फैसला मंजूर है '

   'मानव राजू का न्याय जिंदा बाद'' 

   'यहां का कानून है यदि राज्य में रहने वाला बकुली दुसरे राज्य में चला जाए तो उसकी हत्या कर दि जाती है जब कि हर राज्य के बकुली कि इच्छा होती है कि वह दूसरे राज्य में जाए   ऌस समस्या का कया हल है? '

   ' एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर हत्या कर देना महा पाप है 'पूरा ग्रह एक है फर्क सिर्फ इतना है कि लोग राज्यो में बटे हैं हमारे यहां एक देश से दूसरे देश जाने में कोई पाबंदी नही है लोग आजादी से पूरी दुनिया में कहीं भी आ जा सकते है केवल इसके लिए उन्हें अपने देश का पहचान पत्र पास पोर्ट और दूसरे देश के आने की स्वीकृती वीजा लेना पडता है आप लोग भी इस पध्दती का उपयोग कर के सदियों के अमानुषी कानून को खत्म कर सकते है ''

   'हमे यह मंजूर है ' सब एक स्वर में बाले

   ' मानव राजू का दूसरा फैसाला भी स्वीकार किया जाता है' राजा बोला

   ' मानव राजू जिंदा बाद '

   ' हमारे राज्यों में कुछ ऐसी चिजें पैदा होती है जो ूदूसरे राज्यों में पैदा नही होतीं, जब की दूसरे राज्यो के लोग उन्हे खाना ,लेना चाहते हैं परंतु एक राज्य की चीज दूसरे राज्य में ना जाने के  कानून के कारण ऐसा संभंव नही हो पाता है '

   'आप उस कानून को तोड दीजिए और व्यापार के नियम को अपनाईए ' राजू बोला ' आप के राज्य में जो चीजें पैदा होती है दूसरे राज्य में लेजा कर बेचिए जो चीजें आपके यहां पैदा नही होती है दूसरे राज्य में पैदा होती हो वह वहां से मंगवाईए '

   ' अरे वाह यह तो बहुत अच्छी बात है ऌस प्रकार से हमे सारे राज्यो की चीजें खाने को मिलेंगी 'कोई उछल कर बोला ' और हमे हमारी चीजें दूसरे राज्यों में बेच कर पैसा कमाने ,व्यापार करने का अवसर भी मिलेंगा '

   ' हमे मंजूर है ' सब एक स्वर में बाले और राजू कि न्याय की जय जय कार करने लगे '

   राजू कई दिनों तक वहां रहा उस ने इस बीच सेंकडों सदियों से चले आ रहे विवादों के फैसले कर दिए जिसे सभी ने स्वीकार कर लिया

   हर किसी को राजू का इन्साफ पसंद आया

   एक महीने बाद एक विशेष यान राजू को वापस धरतर पर उसके घर छोड गया 

-----------समाप्त--------------------

 

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