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सुपर कंप्यूटर का आतंक

लेखक:-एम मुबीन

 

केवल दस मिनट में पूरे मुंबई शहर में जैसे एकप्रलय आ कर चली गई चारों ओर से दुर्घटनाओं के समाचार आ रहे थे

शहर के हर चौराहे पर गल्त सिगन मिलने के कारण चारों ओर से गाडियां चल पडीं थीं जिस से हजारों गाडियां एक दूसरे से टकरा गई थीं हजारों दुर्घटनाए हुई थीं सैंकडो लोग मारे गए थे, घायल हुए थे

दुर्घटनाए गलत सिगनल मिलने से सडकों पर ही नहीं हुई थी, सौ के लग भग लोकल गाडियां एक दुसरे से गलत सिगनल मिलने के कारण टकरा गई थी उन लोकल गाडियों के टकराने से बडे भयानक परिणाम सामने आए थे

उन में मरने वालों की संख्या हजारों तक पहुंच गई थी घायल भी हजारों थे रुक़ी गाडियों के चलने के संकेत मिले थे चलती गाडियों को रुकने के, इसी से गड बडी हो गई थी और यह दुर्र्घटनाए हुई थी

हवाई अडडे पर हवाई जहाजो के साथ भी यही हुआ था रुके हवाई जहाजो को उडने का आदेश मिला था उतरने वालों को रुकने का, इस का फल यह निकला कि आकाश में प्रतिक्षा करने वाले और उडने वाले कई हवाई जहाज एक दूसरे से टकरा गए थे

कुछ हवाई जहाजो को एैसे रन वे पर उतरने के संकेत मिले थे जिन पर पहले से हवाई जहाज खडे थे फल स्वरुप वे एक दूसरे से टकरा गए थे

बंदर गाह पर कोई बडी दुर्घटना नही हुई थी केवल रुके जहाज चल पडे थे और जिन जहाजो को समुंद्र में रुकना था वे गोदी  से आलगे थे

2050 में मुंबई शहर की सारी याता यात को नियंत्रन करने के लिए उसे एक सुपर कंप्युटर को सोंप दिया गया था

वह सुपर कंप्यूटर सडक, रेल, हवाई और जल मार्ग की याता यात को नियमित करता था  अभी तक वह सुपर कंप्यूटर बहुत अच्छी तरह काम कर रहा था कभी काई मामूली सी दुर्घटना भी नही हुई थी

परंतू अचानक पूरे दस मिनट तक वह कंप्यूटर चारों मार्गों की यातायात को गलत आंदेश और सेंकत देता रहा और यह प्रलय आई

दस मिनट बाद फिर वह नियमित काम करने लगा था इन दुर्घटनाओं का कारण क्या था यह तो तुरंत मालूम हो गया क़ि सुपर कंप्यूटर से गलती हुई थी

इस लिए कंप्यूटर के सारे विशेषज्ञ उस सुपर कंमप्यूटर की जांच में लग गए

उन में हुनैन के पिता जी डॉ अन्सारी भी थे

वह सुपर कंप्यूटर के नियंत्रक थे

सारे विशेषज्ञों ने सुपर कंप्यूटर एक्स वी 2 की अच्छी तरहा जांच की, परंतु उन्हें कहीं भी कोई खराबी दिखाई नहीं दी

कंप्यूटर नियमित काम कर रहा था

इस प्रकार खराबी तो समझ में नहीं आ सकी परंतु सब कुछ नियमित चलता रहा

परंतु दूसरे दिन फिर वही प्रलय आई

दस मिनट तक फिर कंप्यूटर ने गलत आदेश और संकेत दिये और चारों मार्गों पर फिर वही दुर्घटनाए हो गई

दस मिनट बाद कंप्यूटर फिर नियमित काम कर के सही आदेश और संकेत दे रहा था परंतु उन दुर्घटनाओं के कारण चारों ओर हाहाकार मची हुई थी और आतंक फैला हुआ था

फिर विशेषज्ञ उसकंप्यूटर की जांच में लग गए और इस बार उन्हे इस गडबडी का कारण भी समझ में आ गया

सुपर कंप्यूटर के संचालन के कार्यक्रममें कुछ घातक बदलाव के वायरस डसल दिए गए थे जिन के कारण यह तबाही आई थी

उन  घातक बदलाव के वायरस ने कंप्यूटर के कुछ संकेतों को नष्ट कर दिया था जिस के कारण उस ने गलत संकेत दिए थे

आम तौर पर सुपर कंप्यूटर पर घातक बदलाव के वायरस इता क़े आक्रमण और घात से उन पर कोई प्रभाव नही होता है परंतु यह बिलकुल नए घातक बदलाव के वायरस थे अब उन को सुपर कंप्युटर से निकालना सब से बडी समस्या थी 

और सारे विशेषज्ञ इस के लिए सिर पकड कर बैठे थे उन घातक बदलाव के वायरस को कंप्युटर से निकालना है तो कम से कम  तीन चार दिन कंप्युटर बंद करना पडेगा

और एक क्षण के लिए भी कंप्युटर बंद करना संभव नही था क्योंकी यदि कंप्यूटर बंद हो गया तो यातायात ठब हो जाएगी

यदि उन  घातक बदलाव के वायरस प्रोग्राम को नही निकाला गया तो वे फिर आतंक मचाएगे और वही दुर्घटनाए होगी प्रलय आएगी

उस दिन हुनैन के पिता डॉ अन्सारी घर आएतो बहुत चिंतित थे

' क्या बात है पिता जी आप बहुत चिंतित दिखाई द ेरहे है ?' हुनैन ने उनसे पुछा

उत्तर में उन्हों ने हुनैन को सारी कहानी सुनाई

'' अब समस्या यह है कि एक क्षण के लिए भी कंप्यूटर बंद नही कर सकतें, और बिना कंप्यूटर बंद किए घातक बदलाव के वायरस भी नही निकाल सकते यदि घातक बदलाव के वायरस नही निकले तो फिर वही कयामत आएगी  हम सब तो किसी रास्ते को ढूंढने में असफल हो गए है ेबेंटा अब तुम ही कोई रास्ता ढूंढो

''ठिक है पिता जी'' कहते हुनैन सोच में डूब गया कि किसी तरहा इस समस्या का समाधान निकाला जाए ?

रात भर वह इसी बारे में सोचता रहा सवेरे अचानक एक विचार उसके मस्तिष्क में आया वह तुरंत दौड ता हुआ अपने पिता के पास गया

'पिता जी, मुझे यह बताईये जो सुपर कंप्यूटर एकस वी 2 यातायात नियंत्रण करता है हमारे पास क्या उतनी शक्ति क्षमता  का कोई और सुपर कंप्यूटर है ?'

' हां है'

'हम उस कंप्यूटर में क्या यात यात का कार्यक्रम लगा सकते है ?

'हां '

''फिर तो समस्या हल हो गई आप उस दूसरे सुपर कंप्यटर में याता यात का कार्यक्रम लगा कर उसे मुख्य कंप्यूटर से जोड दे वह याता यात नियत्रण करेंगा ज़िस कंप्यूटर में घातक बदलाव के  वायरस हुए है उसे बंद कर के उसके घातक बदलाव के वायरस निकाल लिजिए ''

'अरे वाह' डॉ अन्सारी उछल पडे हम ने तो यह सोचा ही नही इस प्रकार हम आसानी से इस समस्या का समाधान निकाल सकते हैं'

हुनैन के सुझाव अनुसार काम किया गया

नए कंप्यूटर से सारे संबध जोड दिए गए बिना कोई विघन हुए सब कुछ समान्य रुप से चलता रहा और इस प्रकार सुपर कंप्यूटर का आतंक हुनैन की सूझ बूझ के कारण खतम हो गया

-----------समाप्त--------------------

 

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