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टुंबाटी ग्रह के वासी

लेखक:-एम मुबीन

 

 

   2056 की बात थी उन के आने की खबर कुछ ही देर में सारे विश्व में फैल गई थी क्यों कि विश्व के सभी अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्रों को पहले उन के आगमन का संकेत मिला था और फिर संदेश 

   ''हम आकाश गंगा कि एक सौर मंडल के एक ग्रह टुंबाटी के वासी है हम बाह्रमांणड के सब से अधिक वैज्ञानिक रुप से प्रगत जीव हैं  हम ने विज्ञान में इतनी प्रगति की है कि अन्य ग्रह के लोग अगले एक हजार वर्षें में भी नही कर पाएंगे इसलिए हम चाहते हैं कि सारी आकाश गंगाओं पर और ऐसे सभी ग्रह जहां जहां जीवन है, पर हमारा नियंत्रण हो  क्योंकि यह हमारा अधिकार है हम इस समय सिर्फ यही प्रस्ताव देने के लिए  धरती पर आ रहे है हम बल, शक्ति, युध्द के जोर पर यह अधिकार प्राप्त नहीं करना चाहते  हम चाहते हैं कि धरती के वासी हमारे विज्ञान में प्रगती, हमारी शक्ति, को देखें परखें और विवेक के आधार पर हमारा वर्चस्व  स्वीकार करें यदि इस के बावजूद भी कोई हमारी श्रेष्टता को स्वीकार नही करेंगा तो फिर हम हमारी शक्ति द्वारा यह श्रेष्टता सिध्द करने का पूरा अधिकार होंगा''

धरती पर उतरते हुए हम कुछ छोटे छाटे वैज्ञानिक चमत्कार बताऐं वह हमारी वैज्ञानिक प्रगति का छोटा सा नमुना होंगा'

    उन्हों ने संदेश भेजा था कि वे अमरिकी अनुसंधान केंद्र नासा पर उतरेंगे

    टुंबाटी के बारे में धरती के लोगों को पता था कि हजारों  प्रकाश वर्ष दूर एक आकाश गंगा में किसी सौर मंडल में टुंबाटी नाम का कोई ग्रह है जहां जीवन के चिन्ह मिलते हैं 

   परंतु उसी टुंबाटी ग्रह के लोग एक दिन धरती पर आकर धरती वासियों को इतनी बडी धमकी देंगे किसी ने सोचा भी नही था

   भारतीय अनुसंधान केंद्र के संचालन डॉ क़बीर और उनका बेटा हुनैन भी टुंबाटी ग्रह के वासियों के अगमान और उनकी धमकी से चिंता में पड गए

   ''डैडी वे लोग क्या वैज्ञानिक चमत्कार बता सकते है?'' हुनैन ने पूछा 

   'ऐसी कोई बात जो आज तक ना हुई हो या जिसका होना असंभव हो' डॉ कबीर ने उत्तर दिया 

   उस समय विश्व के बडे बडे वैज्ञानिक एक दूसरे से हर प्रकार के प्रसार माध्यम पर संबध बनाए विचार विमर्श कर रहे थे कि अचानक पहला चमत्कार हुआ

   सारी दुनिया के कंप्यूटरों ने काम करना बंद कर दिया दुनिया के बडे से बडे और छोटे से छोटे  कंप्यूटर का मानेटर 'खाली' हो गया लाख प्रयत्न करने के बावजूद उन पर कोई संदेश उभर नही पा रहा था जैसे कंप्यूटर बंद हो यह स्थिति केवल कंप्यूटर ही की नही थी बल्कि दुनिया के सारे टी वी सेट भी 'ब्लैंक' हो गय थे किसी भी टी वी पर कोई ध्वनी या चित्र नही उभर रहा था जैसे टी वी सेट बंद हो गया हो

   रेडियो से आवाज गायब हो गई

   सभी टेलीफोन और संपर्क के माध्यम निर्जीव हो गए अावाज संदेश एक ओर से दूसरी ओर जाती ही नहीं थी 

   सारी दुनिया में हा हा कार मच गई 

   यह स्थिति सिर्फ आधे घंटे तक रही आधे घंटे के बाद फिर सब कुछ समान्य हो गया क़ंप्यूटर काम करने लगे टी वी सेट रेडियों,टेलीफोन संपर्क के दूसरे माध्यम चलने लगे

   उस समय तक टुंबाटी के वासी धरती पर उतर चुके थे और फिर आर्श्चय जनक रुप से उनका संपर्क दुनिया के हर संपर्क माध्यम, टी वी, रेडियो, टेलफिोन इता से जुड गया था 

   टी वी पर उनके चित्र उभरने लगे थे, रेडियो पर उनकी आवाज गूंजने लगी थी और अन्य संपर्क माध्यमों पर उनके संदेश आने लगे थे

   यह हमारा एक मामुली सा चमत्कार था इस समय दूनिया के सार संचार माध्यम हमारे कब्जे में हैं  सारे कंप्यूटर हमारे गुलाम हैं वे हमारे आदेश के अनुसार ही काम करेंगे  हम जब चाहे उन्हें बंद कर सकते हैं थोडी देर ही में हम अपना दूसरा चमत्कार पेश करने जा रहे है'

 

   उन्हों ने दूसरा चमत्कार जो पेश किया थोडी देर तक तो किसी को उस का पता ही नहीं चल सका

   क्यों कि बडी आर्श्चय जनक बात हुई थी 

   सारी दुनिया की भाषाऐं और उनके स्वर बिल्कुल बदल गए थे हर कोई अपनी भाषा बोल रहा था परंतु उसके होंटो से कर्कश स्वर निकल रहे थे 

''गडम, बडम,गडम''

   जैसे कर्कश नगाडे बज रहे है, कई वस्तुएं आपस में टकरा रही हैं कोई भी किसी से बात नहीं कर पाता था वह जो कुछ कहता था उसके मुंह से कर्कश स्वर निकल कर सामने वाले को सुनाई देते थे सामने वाला  कहना कुछ चाहता था उसे सिर्फ शोर हंगामा सुनाई देता था 

   क्या करें कुछ देर तो कुछ समझ में नही आया

 परंतु फिर बुध्दीमान लोगो ने मुंह से बोलने कि बजाए कलम से लिख कर एक दूसरे से बात करने की सोची,

'' मैं क्या कह रहा हुं आप समझरहें है?' उन्हों ने लख कर एक दूसरे से पुछा

   'नही मुझे आप की केवल कर्कश आवाज और शोर सुनाई दे रहा है' सामने वाले ने लखकर उत्तर दिया हर कोई परेशान हो गया 

   यह कैसा घोर संकट पैदा हो गया है

सभी की बालने की शक्ति खत्म हो गई लख कर काम चलाना पडेंगा

   रेडियो, टी वी, टेलीफोन पर भी गीत संगीत,संवाद, शब्द के बजाए केवल कर्कश स्वर, शोर गुल ही उभर रहा था 

   आधे घंटे तक यह स्थिती रही 

   आधे घंटे बाद सबकुछ सामान्य हो गया आधे घंटे के बाद फिर टुंबाटी के वासी और उनका संदेश उभरा 

   'यह था हमारा दूसरा चमत्कार इसके बाद तो अनुमान हो ही गया होंगा कि हम कितने शक्ति शाली हैं, इसलिए हमारी शक्ति को नमन करते हुए हमे इस धरती और सारी आकाश गंगाओं का समा्रट स्वीकार कर लिया जाए वरना हम कुछ नही करेंगे आप लोगो से आप की वही शक्ति हमेशा के लिए छीन लेगे जो कुछ देर के लिए छीनी थी और उस समय वापस करेंगे जब टुंबाटी के सामराज्य को सवीकार कर लिया जाएगा '

    उनकी धमकी सुनकर हर कोई सन्नाटे में आ गया

विश्व के सभी राष्ट्रों ने उन्हें संदेश दिया कि धरती पर टुंबाटी ग्रह के साम्रज को सवीकार करने से पहले वे आपस में विचार विमर्श करना चाहते है 

    उन्हों ने इसके लिए एक सप्ताह का समय दे दिया

विश्व के सभी देश इस संबध में विचार विमर्श में लग गए और इस बात का पता लगाने में भी लग गए के जो चमत्कार उन्हों ने दिखाए किस तरहा दिखाए 

    इस बात का पता सब से पहले डॉ क़बीर ने लगाया स्वर, टेलीफो, टी वी के चित्रों और स्वर का एक जगाह से दूसरी जगह जाना सब तरंगो पर निर्भर है तरंग ही है जो यह चीजें एक जगाह से दूसरी जगाह ले जाती है और शायद तरंगो पर नियंत्रण पाने के विज्ञान में उन्हों ने बहुत प्रगति की है 

एक शक्ति शाली तरंग उन्हों ने छोडी और जो तरंगे स्वर, ध्वनी, चित्र को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करती थी उन्हों ने अपना काम बंद कर दिया ,टी वी, रेडियो, टेलीफोन बेजान हो गए कंप्यूटर ने काम बंद कर दिया एक शक्ति शाली तरंग के द्वारा उन्हो ने अपने संदेश का प्रसारण किया और विश्व के सभी टी वी, रेडियो, टेलीफोन पर उन्ही का प्रसारण आने लगा नित्य के प्रसारण कमजोर पड गए एक ऐसी तरंग छोडी जिस ने   ध्वनी की तरंग का विकृर्त कर देती और उन के मुहं से विकृर्त शब्द ध्वनी निकलने लगती'

    ऐसी स्थिति में बिना स्वंय में उनसे मुकाबले का सामर्थ पैदा किए टकरनार् मुखती होंगी 

    इस लिए सभी देशों ने एक निणर्य लेते हुए उन्हें अपने निर्णय से अवगत कर दिया 

    ''धरती के कुछ वैज्ञानिक और राजनेता टुंबाटी ग्रह जाकर आप लोगों की वैज्ञानिक प्रगति देखेंगे उन्हों ने सचमुच यदि आप लोगों को क्षेत्र में शक्तिशाली पाया तो फिर हम धरती पर आपके सामराज्य को सवीकार कर लेंगे '

    वे भी इस के लिए राजी हो गए 

 

 

-----------समाप्त--------------------

 

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